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Tuesday, July 28, 2020

अनुभव करो..


                   आजकल लोगों में आक्रोश बहुत है, उसकी वजह से उनका नज़रिया जो हर चीज़ को हार जीत में तोलने लगता है। ये सबको पता है कि किसी कंपनी में अगर आपको अच्छी पोस्ट चाइए, तो आपको एक चीज़ बहुत जरूरी चाइए वो है "अनुभव"। अनुभव तभी आता है जब आप सीखने की इच्छा से चीजों को करते है और गलतियों नहीं दोहराते, पर आजकल वो अनुभव करने वाला चलन बदल के हार-जीत वाला हो गया है।
                       
                             लोगों में सब्र है ही नहीं, सबको एक दिन में तरक्की चाइए। कुछ कमयाबी के लिए खुद को बेच देते है, कुछ इसलिए कामयाब नहीं है क्युकी वो बिकना नहीं चाहते। सब किसी ना किसी की तरह बनना चाहते है पर कोई ख़ुद को खोजना ही नहीं चाहता, दूसरों की सोच अपने दिमाग में रखके क्या मिलेगा ??? 

                             आजकल लोगों को कामयाब से जायदा फेमस होना है, जाने क्या होड़ लगी है सबको अटेंशन चाइए। एक बात याद रखना उम्र का अक्ल से कोई लेना देना नहीं है, मैच्योरिटी उम्र के साथ नहीं जीवन के अनुभवों के साथ ही आती है।ये सब बातें सिर्फ़ इसलिए बता रहा हूं ताकि आप अनुभव करना सीखो, वो और कोई नहीं करेगा आपको आपके लिए खुद करना पड़ेगा। ये बिल्कुल वैसा ही के जैसे आप पहली बार यूट्यूब से देख के कुछ बना रहे हो और वो पहली बार में ही बेहतरीन बन जाए बाकियों के लिए शायद वो आम बात होगी पर उस एहसास को आपके इलावा और कोई अनुभव नहीं कर सकता।
             
                            अनुभव किसी किताब से नहीं आयेगा और न ही इसका कोई कोर्स है, बारिश की बूंद को महसूस किया है कभी??? वो मिट्टी की खुशबु....... वो स्कूल से लौट के आना और आपके पसंदीदा राजमा की महक आपके नाक के रस्ते पेट में उत्तर जाती थी.....  वो दोस्तों ने जब पहली बार पिलाई थी फिर दो चार पेग खींचने के बाद अगले दिन ही सुद अायी थी। अनुभव करना इसलिए भी जरूरी है जीवन में क्युकी ये आपको, आपके विचारों को व्यक्त करने की ताक़त देता है। 
  
                                  इतना भी क्या कंजुसी करना जीने में???  मरना सबको है और ये भी नहीं पता कौन कबतक साथ है। तो हर चीज अनुभव करो यादों की भी तिजोरी भरते रहो, बाकी किसी की जिदंगी में आप क्या थे वो मायने नहीं रखता खुद की कहानी के हीरो बने रहना। जब एहसासों को जीना सीख जाओगे तो कसम से बता रहा हूं, गाने की एक लाईन से लेकर आसमान के आए बादल तक में खुशी ढूंढ लोगे। 


:-🖋 मनीष पुंडीर 

Thursday, July 23, 2020

उम्मीद नहीं छोड़नी..

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


               हम जिस समय मे जी रहे है यहा जल्दी सबको है.. सब अलार्म लगा के सोते है ,जल्दी जल्दी मे खाते है ,पर फिर भी जहा जाना होता है लेट ही पहुचते है। हर रात सोने के लिए हम नींद से नहीं  मोबाईल के चार्ज से लड़ते है जब वो कम हो जाता है तो फिर घड़ी मे 2 बज चुके होते है ,जमाना बदल गया है पहले बड़े बताते थे के वो इतनी मेहनत करते थे के नींद आराम से आती थी पर आज की पीड़ी यानि हम लोग जब जाग जाग के थक जाते है तब सो जाते है। इसी उम्मीद और वादे के साथ के कल से जल्दी मोबाईल साइड मे रखकर सो जाऊंगा,हम इतनी जल्दी मे रहते है उम्मीद भी बड़ी जल्दी छोड़ देते है।  
      

           समस्या सारी शुरू होती है हमारी सोच के साथ के हम जिसके पास हमसे बढ़कर होता है उसे खुद को जोड़ कर खुद को कोसते रहते है पर ये नहीं सोचते है कुछ वो लोग भी है जिनके पास वो भी नहीं जो हमारे पास है,अक्सर इंसान उस चीज की कदर नहीं करता जो आसानी से मिल जाती है जैसे परिवार और घर सुनने मे अजीब है पर सच है। हर कोई खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश करता रहता है पर एक वक्त आता है जब हम कमजोर पड़ जाते उसी वक़्त मे उम्मीद नहीं छोड़नी,क्युकी जिंदगी भी आपको तब तक नहीं जीतने देगी जब तक वो जीतने की जिद नहीं रखोगे। 

        सबसे पूछो क्या हाल तो सब यही जवाब देते है बस कट रही है यार लाइफ काटने के लिए थोड़ी मिली है, हर किसी को कोई एक चाहिए होता है जिसे वो दिल का हाल बता सके और होना भी चाहिए वो खास कोई भी हो सकता आपके परिवार मे से कोई..आपका कोई दोस्त.. आपकी डायरी पर उन सभी बातों को अंदर पलने मत देना कभी कभी हम परेशानी से परेशान नहीं होते बस कोई वो बात सुनले तो सुकून मिल जाता है।ये आजकल व्हतसेप के स्टैटस मे आम हो गया है आजकल किसी ने किसी के लिए वो लगाया किसी और ने कुछ और समझ लिया, तो उस खास को संभाल कर रखिए और खुद को दूसरों से जोड़ के तोलना बंद कीजिय.. 


आखिर मे दो लाईने.. 

दूसरे के महलों को देख मे अपने मकान को कोसता रहा,
मेरे साथ परिवार था ,वो महलों मे अकेला परिवार को सोचता रहा॥ 
धूल मेरी आँखों मे थी और मै पागल बार बार आईना पोंछता रहा.. 


:-🖋 मनीष पुंडीर 




Wednesday, May 23, 2018

बचपन

#बचपन
आज हम उन पुरानी बातों को सोचते है अपना वो एग्जाम से पहले की रात की टेंशन, 
वो जन्मदिन से एक रात पहले वाली मन ही मन होती प्लानिंग और 
वो रात को चुपके से जाकर फ्रिज से एक बर्फी का टुकड़ा चुपचाप
 मुंह के डाल के वापस लेट जाना।


वो कुल्फी वाले की घंटी सुनते ही छुपाए हुवे सिक्के निकालना,
 वो अपनी नई पेंसिल सबको दिखाना और गलती पकड़े जाने पर वो मासूमियत भरा चेहरा।


सबका बचपन अलग अलग रहा है, पर अभी भी खुद को बड़ा मत होने दो जाने अनजाने
 आपके अंदर का वो बच्चा बाहर आ ही जाता है मानों या ना मानो.....


क्यों अक्सर बारिश देखते ही हाथ फैला के बूंदे महसूस करने को मन करता है, पार्क में लगे झूले.. 
कुल्फी और चाट के ठेले आज भी देख के मन खुश हो जाता है,
जब कोई फुटबॉल आपके पास आता है तो अपनेआप पाव शॉट लगाने को उतारू हो जाता है।


वो जो हस्सी खुद की पुरानी फोटो को देखकर निकलती है,
 वो जो शर्त किसकी राइटिंग जायदा अच्छी स्कूल में लगाई थी .... 
वो जो बोर्ड्स रिजल्ट के दिन आधी जान गले तक आयी थी।


बड़े जो अब हो गए है इस आगे बढ़ने की दौड़ में खो गए है,
अब इंक्रीमेंट की चिंता है और परफॉर्मेंस का भार है... 
अब तो दिन का भी फर्क नहीं पड़ता मंगल है या रविवार है।


पर ये इतनी तहजीब लेकर कहा जाओगे क्या अपने
 बच्चो को भी बस कॉम्पिटिशन और सर्वाइवल ही सिखाओगे, 
खुद के अंदर के बच्चे को जो मार के बैठे हो....
 बाहर निकालो न यार जो भी ख्वाहिश दिल में समेटे हो।



लिखने को बहुत है पर बड़े मशरूफ है आजकल के लोग, 
घड़ी सबके पास है बस वक़्त नहीं एक यही है रोग...


जो यहां तक पहुंचे  उनका ध्यनवाद बाकी
#लेखक फर्जी जनहित में अर्जी


#mani 

Wednesday, May 2, 2018

#जिंदगी

प्रयास कुछ बेहतर के लिए..... सबको खुश रहने का हक़ है,अपने दिल की कहने का हक़ है... बस इसी सोच को बढावा देने का ये प्रयास है.


#जिंदगी
जिंदगी में कई लोगों के लिए पैसा बहुत अहमियत रखता है कई तरक्की के पीछे भागते है पर
आखिर में एक सवाल उनसे पूछे कोई क्या वो सच मे खुश है ??मैंने कभी क्लास में फस्र्ट आने का नहीं सोचा पर कभी लास्ट भी नहीं रहा पर हाँ बहुत से कांड किये है जो आज भी यादों की तिज़ोरी मे महफूज़ है,मार भी खायी है मुर्गा भी बने प्रिंसिपल ने घरवालों को भी बुलाया।

जब हम स्कूल में होते है तो मार्क्स का डर फोर बोर्ड्स कॉलेज जॉब शादी सैटल लाइफ बस उम्र के साथ डर भी बढ़ता रहता है और आखिर में क्या होता है 'राम राम सत्य' बस यही सचाई है।आज जो पल है वहीं है कल क्या होगा किसे पता मैं कल को लेकर बुरा सोचने को नहीँ कह रहा पर कल के खाने का सोच के आज का खाना छोड़ दो ये कहा कि समझदारी है ??


जिंदगी बहुत से रंगों से जुड़ी है कभी अच्छी कभी बुरी सबके साथ है पर चलते रहने में जो मज़ा है वो किसी एक मोड़ पर ठहरने वाला नहीं समझेगा।
पैसे कमाओ पर ख़ुद को इतना मत ख़र्च करो के खोटा सिक्का हो जाओ और हर लम्हे को जियो क्योंकि कल कभी काश न हो।सबको अपनी अपनी दिक्कतें है पर आखिर में जिसके पास दिल की भड़ास निकल सको वो चार यार हमेशा रखना, क्योंकि तन्खा तो धीरे धीरे बढ़ ही जयेगी पर उम्र का सोचो जो बढ़ती जा रही है।
अपने अंदर का बच्चा मत मरने देना कभी...........

आजकल हर जगह लोगों के मन मे सवाल है के क्या हो रहा है चारो तरफ लड़ाई रेप खून वगैरा वगैरा पर आप किसी और की नज़रों से क्यों देखते हो दुनियां को??
अपने आसपास देखो बहुत से हँसते चहरे दिखेंगे, कभी किसी बच्ची को देख मासूमियत के इलावा कुछ आया है मन मे जब कोई बच्चा तुम्हे देख मुस्काने लगे तो चेहरा खिल उठता है।
तुम अकेले नहीं हो बहुत से तुमहारे जैसे भी है जो अच्छे होने का नाटक नही करते सच मे अच्छे है,माना कोई इतना अच्छा भी नही होता के कोई गलती न करे पर कोई इतना बुरा भी नही होता के उसे नफ़रत की नज़रों से देखने लगो।

धर्म जात ये सब स्कूल में नही सिखया गया था मुझे नहीँ फ़र्क पड़ता था कि मैं सलमान के साथ खा रहा हू या सोनू के साथ।दुनिया मे जितनी बुराई tv ओर अखबारों में दिखाई जा रही है वो पूरा सच नही है हम क्यों कुछ भी बिना सोचें समझे मान लेते है,किसी घटना पर दो बात बोल के दिल हल्का करना आसान है पर अपने आसपास की अच्छाई देखना उतना ही मुश्किल।


इच्छाओं की लिस्ट सैलरी स्लीप से ज़्यादा है माना पर इसका मतलब ये नहीं के हम अपने काम से नफ़रत करने लगे,जिनके पास काम नही उनसे पूछो??जितने अपने है उनके साथ वक़्त बिताओ खूब यादें बनाओ कल को बैंक की पासबुक तो प्रिंट हो जयेगी पर यादों की किताब कोरी रह जयेगी।

लोग कल भी यही थे आज भी यही है पर कल का क्या पता ?? तो आगे काश न कहना पड़े इसलिए आज में जियो।ज़रूरी नहीं के आपके efforts हमेशा कामयाब हो पर इसका मतलब ये तो नहीं न के आप क़ाबिल नहीं,हर बोल पर तो धोनी भी छक्का नही मरता यार।


तो बस यही कहूँगा जो आँखों से देखो उसपर यकीन करो जो महसूस हो वही सच है,बाकी सब मोह माया है क्योंकि मैंने हरी की जगह लाल चटनी भी खाई पर कृपा फिर भी नहीं आयी।
जनहित में अर्जी बाकी आपकी मर्जी
#mani

Monday, January 29, 2018

#दो_पल

#दो_पल
मिले दो पल फूसरत के तो मिलू बिछड़े यारों से, 
मिले दो पल की मोहलत तो हिसाब हो अधूरे वादों से।  

मिले दो पल वो बचपन के तो फिर बीफिक्र हो जाऊ मैं,
मिले दो पल वो मां का आंचल फिर चेन से सो जाऊं मैं।

मिले जो दो पल वो सुकून के तो पापा संग साइकिल की सैर हो,
आए फिर वो रविवार जब आंख खुले तो दुपहर हो।

मिले दो पल उस मुलाकात के जब अधूरी बाते पूरी हो,
मिले दो पल ऐसे भी जब कोई ना मजबूरी हो।

मिले दो पल वो मन की करू ना समझाना पड़े जमाने को,
मिले दो पल मुझे खुशी बिना परेशा किए किसी बहाने को।


इन्हीं दो पल के इंतज़ार में जिंदगी खर्च हो रही है, 
उम्मीद जागी हुई है बस किस्मत सो रही है।

#mani

मैं श्रेष्ठ हूं

            अगर आपको अपनी आस्था पर भरोसा है और आप यह यकीन रखते हैं कि आपके किए गए अच्छे कर्म आपको पलट कर मिलेंगे, और आपने हर प्र...