Saturday, February 6, 2021
आत्मसंदेह
Friday, December 25, 2020
ख़ुशी का तराज़ू।
Tuesday, August 18, 2020
आपकी सोच- वरदान या बोझ ???
इस समाज में कुछ भी जो नया किया जाता है, उसके लिए सहमति की ज़रूरत होती है। जैसे कोई नहीं डिश बनाई तो कैसी बनी उसपर घरवालों की सहमति, कपड़े खरीदते वक़्त ये अच्छा या वो अच्छा उसपर दोस्तों की सहमति। धीरे -धीरे ये आपकी आदत में बदल जाता है, इसके चलते हम उन चीजों की भी आदत डाल लेते है जिनके हम कभी ख़िलाफ़ हुआ करते थे।
अगर पूरे दिन की बात करू तो हमारे सामने रोज़ टीवी पर मोबाईल पर कुछ ना कुछ ऐसा परोसा जा रहा है, जिसे हम अनदेखा कर रहे है पर वो साथ ही साथ हमारे दिमाग़ में एक सोच उत्पन्न कर रहा है। वो सोच जो काले गोरे में फ़र्क करती है, वो सोच जो लड़कियों को एक वस्तु की भांति दर्शाती है। ये एड नहीं आपकी सोच पर प्रहार है, जो रोज़ रोज़ आपके दिमाग में घर कर रहा है। रेप की ख़बरें पहले से तीन गुना हो गई है पर आपकी चिंता उसके लिए उतनी ही कम कम, मानों अब आप उसे रोज़ सुनते है तो जैसे आपने उसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा मान लिया है।
किसी भी गलत चीज़ का लगातार होना उसे किसी भी तरह से स्वीकार करने योग्य नहीं बनाता, हां उस गलत ही आदत ज़रूर पड़ जाती है। लोगों में खुद की कोई विचारधारा रही ही नहीं, आज का आदमी पूरे दिन टीवी और सोशल मीडिया का कचड़ा दिमाग में भर के ज्ञान दे सकता है। ये बिल्कुल वैसा ही है कि आपके पास कोई ऐसा मैसेज आया जो की किसी धर्म समुदाय या व्यक्ति विशेष की निंदा पर है, आपने उसे आगे 10 लोगों को भेज अपनी सहमति से उस खेल में अपनी भागेदारी देदी।
आइए इसे अब सरल भाषा में समझते है, रोज़ आप टीवी पर काले से गोरा होने के एड देखते रहते है और वही कोई सैनिटरी पेड का एड आ जाए तो आप रिमोट ढूंढ रहे होते हो। मतलब एक जगह तो आप खुद के प्राकृतिक रंग को बदलने में लगे और और दूसरी ओर उन्हीं की प्राकृतिक समस्या पर शर्म का भाव क्यों??? ये दोगलापन आजकल आम हो चला है।
धर्म जो की एक बहुत सवेदंशील मामला है उस पर आजकल क्या क्या कहते बोलते है लोग ये किसी से छुपा नहीं है, अगर आप उन बोलने वालों में नहीं है तो अच्छी बात है पर आप उसे सुनकर भी उतने ही भागीदार बन रहे है। आपको पता है दुनिया में सबसे अधिक त्यौहार हमारे देश में मनाए जाते है, हालात उतने ख़राब नहीं जीतने आपको मीडिया के माध्यम से दिखाए जाते है। बात सीधी ये भी है कि अगर आप किसी के लिए बुरा कह रहे है तो बुरा सुनने के लिए भी तैयार रहे, पर होता क्या है आप तक किसी एक पक्ष की बाते इस तरीके से रखी जाती है कि दूसरा पक्ष अपने आप गलत साबित हो जाता है।
डिबेट शो के नाम पर बकवास करना आजकल चलन में है, वहीं हर दूसरी वेब सीरीज में नाम पर नाजायज रिश्ते, अश्लीलता को दिखाया जा रहा है। बनाने वाले को दोष क्या दे?? जब देखने वाले ही हम है, ये सब तब तक चलता रहेगा जब तक हम इसे अपनाना बंद नहीं करेंगे। आप चाहे तो इसे बढ़ा भी सकते है और बिगाड़ भी, बस इसी मुहिम में आपका साथ चाहता हूं। इसे तरक्की कहे या दुर्भाग्य आज का युवा सनी लियोनी को तो जानते है पर, शायद हिमा दास के लिए आप में से कईयों को गूगल करना पड़े।
अगर कोई भी आपको ये सीखा रहा है कि अपने धर्म, जाति और समुदाय को अच्छा दिखाने के लिए, दूसरे की बुराई जरूरी है तो आप गलत जगह है। प्रकृति से सीखो सूरज - चांद सबके लिए एक है,एक हवा पानी.....एक ही अनाज..... किसी का नुकसान करके आपकी तरक्की कभी मुमकिन नहीं, ये याद रखना। मसला ये है के गरीब आदमी अपनी रोज़ी रोटी में ही इतना मशगूल रहता है कि उसे इस सबसे कोई लेना देना नहीं, ये जो पढ़ा लिखा अधिक सभ्य वर्ग है उनकी ये समस्या अधिक है।
फर्ज़ कीजिए आपके घर में सांप का बच्चा मिला अपने उसे ये सोच के नहीं भगाया कि बच्चा है क्या करेगा, एक दिन वही इतना बड़ा हो गया कि उसने आपको काटा और आप उसके ज़हर से मर गए। इसी उदाहरण को यदि हम अपने आप से जोड़े तो जिन छोटी छोटी बातों को अभी नजरअंदाज कर रहे है कल वहीं हमारे लिए नुक़सान दायक होंगी, जितनी जल्दी इस खेल को समझोगे उतना सबके लिए अच्छा है।
अंत में यही कहूंगा ये मीडिया आपके लिए जरूरी नहीं आप उसके लिए जरूरी हो, इन्टरनेट एक ऐसी दुकान जैसा है जिसमें आपको अच्छा और बुरा दोनों सामान मिलेगा अब वो आप पर है कि आप उससे लेना क्या चाहते है?? जब आप अपनी पसंद ना पसंद को लेकर सजग रह सकते है, तो मीडिया के प्रति आपकी सहमति भी इसी तरह होनी चाइए आपको पता होना चाहिए कि जिस चीज़ को बढ़ावा दे रहे है वो असल में क्या असर डालेगी ??
:- 🖋️ मनीष पुंडीर
Friday, August 14, 2020
नज़रिया
Sunday, August 9, 2020
दुनियां हमसे कुछ बेहतर चाहती है.....
Thursday, July 23, 2020
उम्मीद नहीं छोड़नी..
Wednesday, May 2, 2018
#जिंदगी
#जिंदगी
जिंदगी में कई लोगों के लिए पैसा बहुत अहमियत रखता है कई तरक्की के पीछे भागते है पर
आखिर में एक सवाल उनसे पूछे कोई क्या वो सच मे खुश है ??मैंने कभी क्लास में फस्र्ट आने का नहीं सोचा पर कभी लास्ट भी नहीं रहा पर हाँ बहुत से कांड किये है जो आज भी यादों की तिज़ोरी मे महफूज़ है,मार भी खायी है मुर्गा भी बने प्रिंसिपल ने घरवालों को भी बुलाया।
जिंदगी बहुत से रंगों से जुड़ी है कभी अच्छी कभी बुरी सबके साथ है पर चलते रहने में जो मज़ा है वो किसी एक मोड़ पर ठहरने वाला नहीं समझेगा।
पैसे कमाओ पर ख़ुद को इतना मत ख़र्च करो के खोटा सिक्का हो जाओ और हर लम्हे को जियो क्योंकि कल कभी काश न हो।सबको अपनी अपनी दिक्कतें है पर आखिर में जिसके पास दिल की भड़ास निकल सको वो चार यार हमेशा रखना, क्योंकि तन्खा तो धीरे धीरे बढ़ ही जयेगी पर उम्र का सोचो जो बढ़ती जा रही है।
अपने अंदर का बच्चा मत मरने देना कभी...........
आजकल हर जगह लोगों के मन मे सवाल है के क्या हो रहा है चारो तरफ लड़ाई रेप खून वगैरा वगैरा पर आप किसी और की नज़रों से क्यों देखते हो दुनियां को??
अपने आसपास देखो बहुत से हँसते चहरे दिखेंगे, कभी किसी बच्ची को देख मासूमियत के इलावा कुछ आया है मन मे जब कोई बच्चा तुम्हे देख मुस्काने लगे तो चेहरा खिल उठता है।
धर्म जात ये सब स्कूल में नही सिखया गया था मुझे नहीँ फ़र्क पड़ता था कि मैं सलमान के साथ खा रहा हू या सोनू के साथ।दुनिया मे जितनी बुराई tv ओर अखबारों में दिखाई जा रही है वो पूरा सच नही है हम क्यों कुछ भी बिना सोचें समझे मान लेते है,किसी घटना पर दो बात बोल के दिल हल्का करना आसान है पर अपने आसपास की अच्छाई देखना उतना ही मुश्किल।
इच्छाओं की लिस्ट सैलरी स्लीप से ज़्यादा है माना पर इसका मतलब ये नहीं के हम अपने काम से नफ़रत करने लगे,जिनके पास काम नही उनसे पूछो??जितने अपने है उनके साथ वक़्त बिताओ खूब यादें बनाओ कल को बैंक की पासबुक तो प्रिंट हो जयेगी पर यादों की किताब कोरी रह जयेगी।
लोग कल भी यही थे आज भी यही है पर कल का क्या पता ?? तो आगे काश न कहना पड़े इसलिए आज में जियो।ज़रूरी नहीं के आपके efforts हमेशा कामयाब हो पर इसका मतलब ये तो नहीं न के आप क़ाबिल नहीं,हर बोल पर तो धोनी भी छक्का नही मरता यार।
तो बस यही कहूँगा जो आँखों से देखो उसपर यकीन करो जो महसूस हो वही सच है,बाकी सब मोह माया है क्योंकि मैंने हरी की जगह लाल चटनी भी खाई पर कृपा फिर भी नहीं आयी।
जनहित में अर्जी बाकी आपकी मर्जी
#mani
Friday, March 9, 2018
Parmotion of life
कभी सोचता हूँ अकेले मैं बैठे कभी के क्या जिंदगी में तूने कमाया है,
:= मनीष पुंडीर
Monday, December 4, 2017
सर्दी की धूप
#सर्दी_कि_धूप
तू सर्दी कि धूप सा छू जा मेरे ठन्डे पड़े एहसासों पर और उन्हें खुशनुमा करदे,
मै भी खिल जाऊ तेरी गर्माहट से जो तू मुझे बाहों में भरले।
गलत सही से परे सोच की उदेढ़ बुन छोड़ कभी मुझे वो पल दे जो किसी अच्छे बुरे के पैमानों से परे हो,
तेरे हसने की वजह...तेरे रूठने का अंदाज़...हो कुछ आदतें जिनपर सिर्फ हक मेरे हो।
किसी दिन रोक दू सारी कायनात जब तू मेरे साथ हो,मेरी आग़ोश में हो तू बेखोफ ऐसी भी एक रात हो...
जब बातें बेफ़िज़ूल लगे और साँसों में बात हो,सारी शिकायतों का हिसाब हो ऐसी भी एक मुलाकात हो|
इस सर्दी मुकम्ल हो हमारी वो तन्हा काटी ठंड की रातों वाली हसरते......के सुध बाकि न रहे,
इस कदर हो संगम तेरा मेरा के मुझमे खो जाये तू........खुद में तू बाकि न रहे.
:- मनीष पुंडीर
Thursday, November 30, 2017
जिंदगी
खुश हूँ अपनी हैसीयत से जो भी कमाया जिंदगी में सब सचा मिला,
मैं श्रेष्ठ हूं
अगर आपको अपनी आस्था पर भरोसा है और आप यह यकीन रखते हैं कि आपके किए गए अच्छे कर्म आपको पलट कर मिलेंगे, और आपने हर प्र...
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हम सब अपनी जिंदगी बेहतर करने में लगे है, अपने लिए अपनों के लिए। न जाने कितने लोग मेरे साथ सहमत होंगे पर कभी ...
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तो आज बात करूंगा आदमियों की यानी अपनी आपकी हर उसकी जो बेटे भाई पति सारे किरदार एक साथ निभा रहा है। औरतों पर बहुत कुछ लिखा गया है...
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ये दुनिया है यहाँ आदमी याद मतलब तक.. सभी है मतलब से यहाँ बस सभी मतलबों के मायने अलग है, कड़वी है बात पर आखरी वक़्त में कोई ना रहता ...
