Thursday, October 8, 2020
समाज और समझ
Saturday, September 19, 2020
घर से दूरी.......
Sunday, September 13, 2020
ज़ुबान
Sunday, August 9, 2020
दुनियां हमसे कुछ बेहतर चाहती है.....
Thursday, July 23, 2020
उम्मीद नहीं छोड़नी..
Wednesday, May 23, 2018
बचपन
आज हम उन पुरानी बातों को सोचते है अपना वो एग्जाम से पहले की रात की टेंशन,
#लेखक फर्जी जनहित में अर्जी
Wednesday, May 2, 2018
#जिंदगी
#जिंदगी
जिंदगी में कई लोगों के लिए पैसा बहुत अहमियत रखता है कई तरक्की के पीछे भागते है पर
आखिर में एक सवाल उनसे पूछे कोई क्या वो सच मे खुश है ??मैंने कभी क्लास में फस्र्ट आने का नहीं सोचा पर कभी लास्ट भी नहीं रहा पर हाँ बहुत से कांड किये है जो आज भी यादों की तिज़ोरी मे महफूज़ है,मार भी खायी है मुर्गा भी बने प्रिंसिपल ने घरवालों को भी बुलाया।
जिंदगी बहुत से रंगों से जुड़ी है कभी अच्छी कभी बुरी सबके साथ है पर चलते रहने में जो मज़ा है वो किसी एक मोड़ पर ठहरने वाला नहीं समझेगा।
पैसे कमाओ पर ख़ुद को इतना मत ख़र्च करो के खोटा सिक्का हो जाओ और हर लम्हे को जियो क्योंकि कल कभी काश न हो।सबको अपनी अपनी दिक्कतें है पर आखिर में जिसके पास दिल की भड़ास निकल सको वो चार यार हमेशा रखना, क्योंकि तन्खा तो धीरे धीरे बढ़ ही जयेगी पर उम्र का सोचो जो बढ़ती जा रही है।
अपने अंदर का बच्चा मत मरने देना कभी...........
आजकल हर जगह लोगों के मन मे सवाल है के क्या हो रहा है चारो तरफ लड़ाई रेप खून वगैरा वगैरा पर आप किसी और की नज़रों से क्यों देखते हो दुनियां को??
अपने आसपास देखो बहुत से हँसते चहरे दिखेंगे, कभी किसी बच्ची को देख मासूमियत के इलावा कुछ आया है मन मे जब कोई बच्चा तुम्हे देख मुस्काने लगे तो चेहरा खिल उठता है।
धर्म जात ये सब स्कूल में नही सिखया गया था मुझे नहीँ फ़र्क पड़ता था कि मैं सलमान के साथ खा रहा हू या सोनू के साथ।दुनिया मे जितनी बुराई tv ओर अखबारों में दिखाई जा रही है वो पूरा सच नही है हम क्यों कुछ भी बिना सोचें समझे मान लेते है,किसी घटना पर दो बात बोल के दिल हल्का करना आसान है पर अपने आसपास की अच्छाई देखना उतना ही मुश्किल।
इच्छाओं की लिस्ट सैलरी स्लीप से ज़्यादा है माना पर इसका मतलब ये नहीं के हम अपने काम से नफ़रत करने लगे,जिनके पास काम नही उनसे पूछो??जितने अपने है उनके साथ वक़्त बिताओ खूब यादें बनाओ कल को बैंक की पासबुक तो प्रिंट हो जयेगी पर यादों की किताब कोरी रह जयेगी।
लोग कल भी यही थे आज भी यही है पर कल का क्या पता ?? तो आगे काश न कहना पड़े इसलिए आज में जियो।ज़रूरी नहीं के आपके efforts हमेशा कामयाब हो पर इसका मतलब ये तो नहीं न के आप क़ाबिल नहीं,हर बोल पर तो धोनी भी छक्का नही मरता यार।
तो बस यही कहूँगा जो आँखों से देखो उसपर यकीन करो जो महसूस हो वही सच है,बाकी सब मोह माया है क्योंकि मैंने हरी की जगह लाल चटनी भी खाई पर कृपा फिर भी नहीं आयी।
जनहित में अर्जी बाकी आपकी मर्जी
#mani
Friday, March 9, 2018
Parmotion of life
कभी सोचता हूँ अकेले मैं बैठे कभी के क्या जिंदगी में तूने कमाया है,
:= मनीष पुंडीर
Monday, February 26, 2018
फ़ुरसत
Monday, January 29, 2018
#दो_पल
Thursday, December 28, 2017
#हो_कोई_ऐसा??
#हो_कोई_ऐसा??
हो कोई ऐसा जिसे हम अपना कहें ,
चाहें हो जितनी भी दूरी पर वो हर वक़्त ख्यालो में रहे..
जिसकी हस्सी की वजह बने को मन करे,
जिसके एक रिप्लाई को हम अपनी निंदो से बगावत करे...
जिसके गले लगने से सुकून का एहसास हो,
कोई हो ऐसा एक जिसके लिए सिर्फ आप खास हो।
जिसके ख्याल तकिये पर रख खुली आँखो से सपने आये,
जिसकी एक गुड मॉर्निंग से आपका पूरा दिन बन जाये।
हो एक ऐसा भी यार जो तेरी बातों को अच्छे-बुरे के तराज़ू में न तोले,
जिसके साथ वक़्त का होश न हो....जो समझे इशारों की भी जुबान बिन बोले।
जिसके लिए वक़्त से और मोहलत मांगने को मन करे,
जिसे दिल की हो बातें सारी और जिसे देख देख आँखों की नियत न भरे।
जिसको रत 3 बजे आंख खुलने पर कॉल करने से पहले सोचना न पड़े,
हो कोई ऐसा जो अपनी हर फ़िक्र में तुम्हारा ही जिक्र करे.......
अगर है कोई ऐसा तो खुश रखना उसे क्युकी खुसनसीब हो तुम........
#mani
Saturday, December 16, 2017
हसरतें
#हसरते
लाखों हसरते है ऐसी के न बताई जाये न दबाई जाये, दुनियां बड़ी चंट न समझ आये और न अपनी किसी को समझाई जाये.....
परिंदा बन उड़ने को मन खूब ज़िद तो करता है,पर मज़बूरी शिकार खूब जानती है ये बात इसे कैसे समझाई जाये ??
नदी किनारें सभी अहसासों का एक दिन में हिसाब करूँगा , लहरें पैरों को छूकर फिर लौट जायेगी पर मैं नही माफ़ करूँगा।।
आईने में देख खुद को आँखों में बचपन टटोलता हूँ, अक़्सर अधुरी ख्वाइशों का बोझ लेकर तकिए पर सोता हूं।।
इस शहर के शोर से दूर कही दूर बस जाऊ जहाँ दिए के उजाले में आज भी दादी-नानी सर सहलाये, बारिश के पानी में कस्ती अपनी बढ़ाये आज फिर किसी बगीचे से आम तोड़ के खाये।।
कुछ है मेरी हसरतें जो पैसे से कीमती है बेचूँगा किसी दिन इन्हें कोई ख़रीदार मिला तो, पर फिर मन ये पूछे मुझसे इन दो कौड़ी के जज़्बातों की क्या कीमत लगाई जाए ??
वैसे मेरे अपने कहते है हँसना भूल गया हूं मैं अब उन्हें क्या वजह बताई जाये, मेरे यारों खुश हूँ तुम हो बस ख़ुद से खफ़ा हूं अब छोड़ो यार क्या नाराजगी जताई जाये।।
#मनीष पुंडीर
मैं श्रेष्ठ हूं
अगर आपको अपनी आस्था पर भरोसा है और आप यह यकीन रखते हैं कि आपके किए गए अच्छे कर्म आपको पलट कर मिलेंगे, और आपने हर प्र...
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तो आज बात करूंगा आदमियों की यानी अपनी आपकी हर उसकी जो बेटे भाई पति सारे किरदार एक साथ निभा रहा है। औरतों पर बहुत कुछ लिखा गया है...
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ये शब्द सुनने में अजीब लग रहा होगा पर ये हमारे साथ हर वक्त साथ रहता हैं, सबके घर में कुछ ऐसी चीजें सिखाई जाती हैं ...
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हम सब अपनी जिंदगी बेहतर करने में लगे है, अपने लिए अपनों के लिए। न जाने कितने लोग मेरे साथ सहमत होंगे पर कभी ...
